जीवन-यात्रा

संघर्ष, आत्मनिर्भरता और जनसेवा की यात्रा।

परिवार से मिले अनुशासन और जिम्मेदारी के संस्कार

06.12.1990
जन्म
स्नातक
शिक्षा

संजीव मिश्रा “फंटन” का जन्म 6 दिसंबर 1990 को एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता भारतीय रेल में वातानुकूलन तकनीशियन के रूप में कार्यरत थे। दादा उत्तर प्रदेश पुलिस में सेवा देने के बाद कोतवाल पद से सेवानिवृत्त हुए थे।

बचपन और किशोरावस्था में सरकारी सेवा से जुड़ी पारिवारिक पृष्ठभूमि ने मेहनत, अनुशासन और जिम्मेदारी का वातावरण दिया। आगे आने वाली कठिन परिस्थितियों ने इन्हीं मूल्यों को जीवन की वास्तविक आवश्यकता बना दिया।

संजीव मिश्रा फंटन

कम उम्र में आया जीवन का सबसे कठिन मोड़

बड़े भाई की दुर्घटना में मृत्यु परिवार के लिए गहरा आघात थी। उसके बाद पिता का निधन हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति कठिन हो गई और दैनिक भरण-पोषण तक की जिम्मेदारी सामने आ खड़ी हुई।

यही वह समय था जब उम्र से पहले जिम्मेदारी उठानी पड़ी। कठिनाई ने उन्हें काम से दूरी बनाने के बजाय उपलब्ध काम को सम्मान के साथ स्वीकार करना सिखाया।

उपलब्ध काम को सम्मान के साथ स्वीकार करना।

काम, पढ़ाई और आत्मनिर्भरता की नींव

2009–2011

पेशेवर चालक और कुछ समय निजी चालक के रूप में काम करते हुए परिवार की जिम्मेदारी संभाली। इसी दौरान पढ़ाई जारी रखी।

स्नातक

आर्थिक कठिनाइयों और काम के साथ शिक्षा को जारी रखना इस दौर की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।

ठेकेदारी

लगभग 2011 से श्रमिकों की व्यवस्था, मिट्टी की आपूर्ति, वाहनों और निर्माण-सम्बन्धी व्यवस्थाओं में काम का विस्तार हुआ।

व्यवसाय बढ़ा, तो सहयोग की क्षमता भी बढ़ी

लगभग 2015 से संपत्ति क्रय-विक्रय, भूमि-सम्बन्धी कार्य और भूखंड परियोजनाओं में अनुभव बढ़ा। अलग-अलग लोगों के साथ मिलकर परियोजनाओं पर काम करते हुए व्यावसायिक आत्मनिर्भरता मजबूत हुई।

आर्थिक स्थिति बेहतर होने के साथ जरूरतमंदों के लिए सहयोग का दायरा भी बढ़ा। बच्चों की पढ़ाई, मरीजों के उपचार, बेटियों के विवाह, आवासीय जरूरतों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की सहायता अधिक नियमित रूप से जुड़ती गई।

आत्मनिर्भरता ने जरूरतमंद परिवारों तक सहयोग पहुंचाने की क्षमता को व्यापक किया।

जीवन-यात्रा के प्रमुख पड़ाव

व्यक्तिगत संघर्ष, आजीविका, व्यवसाय, जनसेवा और सार्वजनिक जिम्मेदारियां एक निरंतर यात्रा के रूप में आगे बढ़ीं।

जन्म और पारिवारिक संस्कार

6 दिसंबर 1990 को जन्म। भारतीय रेल और उत्तर प्रदेश पुलिस में सेवा से जुड़ी पारिवारिक पृष्ठभूमि ने मेहनत और अनुशासन का वातावरण दिया।

1990

परिवार की जिम्मेदारी

बड़े भाई की दुर्घटना में मृत्यु और उसके बाद पिता के निधन ने परिवार की परिस्थितियां बदल दीं। कम उम्र में जिम्मेदारी उठानी पड़ी।

युवा अवस्था

चालक के रूप में काम और पढ़ाई

आजीविका के लिए पेशेवर चालक के रूप में काम किया, कुछ समय निजी चालक की जिम्मेदारी निभाई और साथ ही स्नातक शिक्षा पूरी की।

2009–2011

ठेकेदारी की शुरुआत

लखनऊ में निर्माण और विकास कार्यों के दौरान श्रमिक व्यवस्था, मिट्टी आपूर्ति, वाहन और परिवहन जैसी जिम्मेदारियों के साथ काम का विस्तार हुआ।

लगभग 2011

संपत्ति-सम्बन्धी व्यवसाय

संपत्ति क्रय-विक्रय, भूमि-सम्बन्धी कार्य और भूखंड परियोजनाओं में अनुभव बढ़ा। व्यावसायिक आत्मनिर्भरता ने सामाजिक सहयोग की क्षमता भी बढ़ाई।

लगभग 2015

जनहित और संगठनात्मक जीवन

भदरुख में स्थानीय स्वच्छता और नागरिक व्यवस्था के विषय पर ग्रामीणों के साथ आंदोलन सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बना।

2017

जनसेवा और सार्वजनिक जिम्मेदारियां

जनसंपर्क, सामाजिक सहयोग, स्थानीय विषयों और संगठनात्मक गतिविधियों के बीच सक्रिय सार्वजनिक भूमिका जारी है।

वर्तमान

व्यक्तिगत सहयोग से सार्वजनिक जिम्मेदारी तक

2017 में भदरुख क्षेत्र में स्वच्छता और स्थानीय व्यवस्था से जुड़े प्रश्न पर ग्रामीणों के साथ बड़ा धरना सार्वजनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बना। व्यक्तिगत सहायता के साथ सामुदायिक समस्याओं को उठाने की भूमिका अधिक स्पष्ट हुई।

इसके बाद सामाजिक संगठनों, युवा संगठनात्मक गतिविधियों और भारतीय जनता पार्टी की जिम्मेदारियों में सक्रियता बढ़ी। वर्तमान में जिला मंत्री की संगठनात्मक जिम्मेदारी और दूरसंचार क्षेत्र से जुड़ी भारत सरकार की सलाहकार समिति में सदस्यता भी सार्वजनिक भूमिका का हिस्सा है।

सार्वजनिक जीवन